हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत "नहजुल बलाग़ा" किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार है:
قال امیرالمؤمنین علیه السلام:
وَلَعَمْرِی مَا عَلَیَّ مِنْ قِتَالِ مَنْ خَالَفَ الْحَقَّ، وَخَابَطَ الْغَیَّ، مِنْ إِدْهَانٍ وَلَا إِیهَانٍ.
अमीरुल मोमेनीन इमाम अली (अ) ने फ़रमायाः
और मेरी ज़िंदगी की क़सम! मुझे हक़ के ख़िलाफ़ चलने वालों और गुमराही में भटकने वालों से जंग में किसी तरह की नरमी और कमज़ोरी नहीं होगी।
नहजुल बलाग़ा, खुत्बा नंबर 24
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